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किसी विचारधारा तक सीमित नहीं बल्कि अन्याय के विरुद्ध सशक्त आवाज है पत्रकारिता

 

              खींचो न कमानों को न , तलवार निकालो।
               जब तोप मुक़ाबिल हो तो अख़बार निकालो।।

यह शेर अकबर इलाहाबादी ने जब लिखा था तब भारत में अंग्रेजी सरकार थी उसकी कू्ररता चरम सीमा पर थी।

भारत वासियों पर अत्याचार हो रहे थे। ऐसे वक्त में भी तोपों और तलवारों से अधिक ताकतवर कलम को बताया गया। कलम कागज पे आकृति उकेरने का नाम नहीं है , बल्कि समाज के हितों के लिए लडऩे का नाम है। पत्रकारिता समाज को बदलने और उसे जागरुक करने का एक माध्यम है। कुरूतियों को मिटाने, वंचितों को न्याय दिलाना, दूरदराज के लोगों की आवाज सरकार तक पहुंचाना और सरकार की योजनाओं को लाभार्थियों तक पहुंचाना शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, रोजगार विकास के नाम पर हो रहे भ्रष्टाचार को रोकना मुख्य उद्देश्य है। क्योंकि आज देश में लोकतांत्रिक सरकार है।
पत्रकार को निष्पक्ष होना चाहिए अच्छाई को उजागर करें और बुराई को रोके यहीं पत्रकार का कर्तव्य है। पत्रकार द्वारा कालाबाजारी, अनैतिक कार्य करने वालों के विरुद्ध खबर प्रकाशित करना कोई अपराध नहीं है। सफेदपोश के संरक्षण में प्रकृति को नुकसान पहुंचाना। नदियों से रेत का निकालना और वनों को काटना, पहाड़ों को खोदना , प्रदूषण फैलाना आमतौर पर इन सभी पर नजर रखने और अवैध तरीके से कार्य करने वालों को रोकने के लिए सरकार ने विभिन्न विभाग बनाए हैं। इसी तरह से सामाजिक अपराधों को रोकने के लिए भी पुलिस विभाग जैसी ताकतवर संस्थाएं हैं जब यह संस्थाएं अपने कर्तव्य पथ से भटक जाती हैं और भ्रष्ट लोगों के चंगुल में फंस जाती हैं तो वह फरियादी को अपराधी और अपराधी को फरियादी बना देती है और विरोधियों को कुचलने के लिए नेता भी साम ,दाम , दंड , भेद की राजनीति से परास्त करने में पीछे नहीं रहते इन्हीं सब चीजों को एक पत्रकार उजागर करता है , तो वह सरकार के विरुद्ध नहीं बल्कि जनहित में सरकार का सहयोग ही करता है। आज दुनिया में सोशल मीडिया के माध्यम से संचार क्रांति आई है, अखबार के अलावा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया , सोशल मीडिया ,वेबसाइट , व्हाट्सएप गु्रप , फेसबुक, यूट्यूब चैनल जैसे अनेकों माध्यम विकसित हुए हैं। सही और सच्ची पत्रकारिता जैसे लुप्त होती जा रही है। विचारधारा वाली और स्वार्थ की पत्रकारिता ने मीडिया को बदनाम कर दिया है। चाटुकारिता से लेकर सरकारी दरबारी, गोदी मीडिया जैसे उपनाम दे दिए गए हैं क्योंकि यह लोग पत्रकारिता निष्पक्षता के साथ नहीं बल्कि विचारधाराओं के खेमें में बंटकर काम कर रहे हैं। इसी वजह से पत्रकारिता का कर्तव्य लुप्त हो रहा है। पत्रकार अपने समाज जागरण के मिशन में असमर्थ हैं। आज पत्रकारिता का अर्थ है किसी गुट का , किसी सिंडिकेट का , किसी विचारधारा का समर्थक होना ना कि निष्पक्ष रुप से समाज और सरकार को आईना दिखाना।

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