जंगल की जमीन पर अमीरों का बना भव्य भवन, लेकिन गरीबों के प्रधानमंत्री आवास पर 2 वर्षों से वन विभाग की रोक
वन विभाग के बीट प्रभारी व डिप्टी रेंजर की मिलीभगत से अमीरों के बन गए मकान
प्रदेश सत्ता जिला ब्यूरो मुनेन्द्र यादव

मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के अंतिम छोर में बसा ग्राम पंचायत फुलकोना के फुलवारी टोला जो की राष्ट्रीय राजमार्ग से लगा वन विभाग की जमीन पर स्थित है वर्षों से यहां पर निवास कर रहे है बताया जाता है कि यहां पर हरिजन,आदिवासी,ओबीसी तबके के लोग 70,80 वर्षों से निवासरत है जिनके पास आज भी पूर्वजों की जमीन नाम मात्र की है उन लोगों को प्रधानमंत्री आवास के तहत मकान बनाने के लिए पहला किस्त जारी कर दी गई है लेकिन वन भूमि होने के कारण वहां पर वन विभाग द्वारा रोक लगी हुई है जबकि वह के लोग प्रधानमंत्री आवास योजना के चक्कर में अपना पुराना मकान तोड़कर आवास का निर्माण करना चाह रहे थे लेकिन वन विभाग की नजर गरीबों के आशियाने पर खटक गई और आज भी ये लोग आवास बिहीन है इनका घर तो नहीं बना लेकिन सोचनीय सवाल यह है कि कुछ कालरी रिटायरमेंट व बिजनेसमैन करोड़ों की संपत्ति रखने वाले उन गरीबों से ओने पौने दाम में उनकी काबिज जमीनों को खरीद फरोख्त करके अपना आलीशान मकान तान कर मौज की जिंदगी जी रहे हैं इसमें मुख्य रूप से जंगल विभाग के बीट प्रभारी व डिप्टी रेंजर का सहयोग जबरदस्त है सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यह कहा जाता है कि हम लोग तो पैसे देकर यह जमीन इन लोगों से खरीदा है हमारे पास पैसा की कोई कमी नहीं है और हम किसी भी जंगल कर्मचारी व अधिकारी को खरीद सकते हैं इन्हें के दम पर हमारा आलीशान भवन बनकर तैयार है पर जहां तक सवाल यह उठता है कि आज जिन गरीबों का मकान पहला किस्त आने के बाद रुका हुआ है क्या वह कभी बन पाएगा या नहीं यह सोचनीय सवाल है जो कालरी कर्मचारी व कालरी से रिटायरमेंट जंगल व राजस्व की जमीन पर किस आधार पर हक दिया गया है कि वह अतिक्रमण करके अपना आलीशान भवन बनाकर निवासरत रहे वहीं पर लगभग 23 लोगों का प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पहला किस्त लगभग 2 वर्ष पूर्व मिला और वह लोग अपना मकान तोड़ कर आज बेघर होकर जीवन जीने को मजबूर हैं लेकिन जंगल विभाग की व्यवस्था देखिए जो लोग गरीब हैं जिनके पास कुछ जमीने हैं और कुछ लोगों के पास एक डिसमिल जमीन भी नहीं है वह लोग दर दर की ठोकर खा रहे हैं और जो कालरी कर्मचारी है या कालरी से रिटायरमेंट व्यक्ति हैं उनको जंगल विभाग का अभयदान मिला हुआ है।



