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छतरपुर की 18 वर्षीय बेटी का जलवा, कैनोइंग में जीते 20 मेडल—स्टेट से इंटरनेशनल तक लहराया परचम

छतरपुर
 छोरियां छोरों से कम नहीं होतीं तभी तो बुन्देलखंड के छतरपुर की छोरियां जिले का नाम रोशन करने में आगे दिखाई दे रही हैं. हाल ही में क्रांति गौड ने देश की महिला क्रिकेट टीम में खेलकर पूरी दुनिया में छतरपुर का नाम रोशन किया है. ऐसी ही एक किसान की 18 साल की बेटी ने एक दो नहीं बल्कि 20 मेडल जीत कर देश और जिले का नाम आगे बढ़ाया है. वाटर स्पोर्ट्स प्रतियोगिता में 9 राज्य स्तरीय, 10 नेशनल स्तरीय और 1 इंटरनेशनल मेडल अपने नाम किया है.

इंटरनेशन प्रेसीडेंट कप में चंद्रकला ने सिल्वर मेडल हासिल किया

छतरपुर शहर के वार्ड नम्बर 8 की रहने वाली किसान की 18 साल की बेटी चंद्रकला कुशवाहा को नवम्बर 2025 में उत्तराखंड टिहरी लेक इंडिया में 28 से 30 नवम्बर 2025 तक आयोजित इंटरनेशन प्रेसीडेंट कप प्रतियोगिता में खेलने का मौका मिला, जिसमें 20 देशों की खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था. चंद्रकला ने सिल्वर मेडल हासिल कर छतरपुर शहर के साथ-साथ जिला सहित पूरे बुंदेलखंड और देश का नाम रोशन किया है.

बचपन से ही गेम का शौक था

दरअसल, छतरपुर शहर की रहने वाली किसान की बेटी चंद्रकला कहती हैं कि "बचपन से ही गेम खेलने का शौक था, प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के बाद कक्षा 6वीं में उसने एक्सीलेंस स्कूल में प्रवेश लिया. जब वह कक्षा 7वीं में थी, तभी स्कूल के माध्यम से शूटिंग के लिए चयन हुआ लेकिन शूटिंग ट्रायल में उम्र कम होने के कारण उसका चयन नहीं हो सका. इसके बाद कोच सौरभ कुशवाहा ने मलखंभ सीखने के लिए प्रेरित किया, तो चंद्रकला ने कक्षा 7 वीं में पढ़ाई के दौरान वर्ष 2019-20 में मलखंभ की कक्षा ज्वाइन कर ली.

मलखंभ के बाद वाटर स्पोर्ट्स में चयन

पहले मलखंभ का अभ्यास किया और फिर कैनोइंग, कयाकिंग, वाटर स्कीइंग यानी वाटर स्पोर्ट्स में चयन. वाटर स्पोर्ट्स की खिलाड़ी बनी चंद्रकला कहती हैं कि मलखंभ कक्षा में सीनियर खिलाड़ी अधिक होने के कारण शुरूआत में मलखंभ अभ्यास करने में उसे कम मौका मिला जिससे उसने अपने घर में छत के कुंदे से रस्सी बांधकर उस पर चढ़ना और अभ्यास करना शुरू किया. इसके बाद कोरोना के समय कुछ दिनों के लिए मलखंभ कक्षाएं बंद हो गईं तो, उसने घर पर ही अपना नियमित अभ्यास जारी रखा.

चंद्रकला के पिता नंद किशोर कुशवाहा एक छोटी सी कपड़ों की दुकान भी चलाते हैं, लेकिन बेटी के हुनर और जज्बे को देखकर घर पर ही मलखंभ के आकार की लकड़ी लगवा दी. घर पर नियमित दो से तीन घंटे अभ्यास करने से मलखंभ और योग के आसन करने में वह पूरी तरह से पारंगत हो गई. शुरूआत में दो साल तक मलखंभ खेलकर पदक प्राप्त किए.

2022 में भोपाल स्पोर्ट्स एकेडमी ज्वाइन की

फिजिकल अच्छा होने से उसका वाटर स्पोर्ट चयन प्रक्रिया में चयन हो गया. जिसके बाद वर्ष 2022 में उसने भोपाल स्पोर्ट्स एकेडमी ज्वाइन की. एकेडमी में पहुंचने के एक साल बाद ही पहला ब्रांज मेडल 2023 दिसम्बर में जीता. इसके बाद चंद्रकला ने अपना अभ्यास जारी रखा और तीन साल में 20 मेडल हासिल किए. चंद्रकला ने बताया कि, यहां तक पहुंचने में उनके दादा स्व. सरमन लाल कुशवाहा का सराहनीय योगदान रहा, वह हमेशा से ही उत्साह बढ़ाते रहे.

चंद्रकला का क्या कहना है

वहीं, जब 20 मैडल जीतने वाली चंद्रकला कुशवाहा बताती हैं कि "मेरी शुरुआत मलखंभ से हुई थी और अब वह कैनोइंग, कयाकिंग के लिए पिछले 3 साल से लगातार प्रयासरत थीं तभी जीत पाईं. 20 मैडल मेरे पास है, जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड टिहरी सहित भोपाल में आयोजित प्रतिगोगिता में हिस्सा लिया है. परिवार का बहुत सपोर्ट रहता है. मेरी पढ़ाई अभी पंजाब के अमृतसर में चल रही है."

क्या बोले चंद्रकला के चाचा

छत्तरपुर की चंद्रकला कुशवाहा के चाचा जानकी कुशवाहा बताते हैं बहुत मेहनत की है बेटी को यहां तक पहुंचाने में, गरीब किसान परिवार से हैं हम लोग, बच्ची का हुनर और जज्बा देखकर उसे आगे बढ़ाया. अब बस यही सपना है देश का नाम रोशन करे."

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