मध्य प्रदेश

मोहन कैबिनेट में बड़े फेरबदल की अटकलें, रिपोर्ट कार्ड के आधार पर कई मंत्रियों की छुट्टी तय?

भोपाल
 मध्य प्रदेश की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री Mohan Yadav के नेतृत्व वाली सरकार 13 जून को अपने ढाई साल पूरे करने जा रही है, लेकिन उससे पहले सत्ता के गलियारों में कैबिनेट फेरबदल की चर्चाओं ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। खबर है कि बीजेपी आलाकमान ने सरकार और संगठन दोनों की परफॉर्मेंस का फीडबैक लेना शुरू कर दिया है। 17 और 18 मई को पार्टी के केंद्रीय समीक्षक भोपाल पहुंचेंगे, जहां मंत्रियों के कामकाज का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जाएगा। सूत्रों की मानें तो इस बार समीक्षा सिर्फ औपचारिक नहीं होगी, बल्कि मंत्रियों के विभागीय प्रदर्शन, जिलों में पकड़, संगठन के साथ तालमेल और जनता के बीच उनकी छवि तक का आकलन किया जाएगा। माना जा रहा है कि जिन मंत्रियों का प्रदर्शन कमजोर पाया जाएगा, उन्हें कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस संभावित फेरबदल की जद में कुछ बड़े और वरिष्ठ चेहरे भी आ सकते हैं।

आमने-सामने होगी जवाबदेही की परीक्षा
पार्टी सूत्र बताते हैं कि मंत्रियों को व्यक्तिगत रूप से बैठाकर उनसे सवाल-जवाब किए जाएंगे। चर्चा का फोकस सिर्फ योजनाओं की फाइलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि मंत्री अपने प्रभार वाले जिलों में कितने सक्रिय हैं, संगठन के कार्यकर्ताओं के साथ उनका व्यवहार कैसा है और जनता के बीच सरकार की छवि मजबूत करने में उनकी भूमिका कितनी प्रभावी रही है। समीक्षक मंत्रियों द्वारा पेश किए गए दावों की जमीनी हकीकत भी जांचेंगे। यही रिपोर्ट आगे कैबिनेट में बने रहने या बाहर होने का आधार बन सकती है।

मॉनसून सत्र से पहले हो सकता है बड़ा बदलाव
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जुलाई में प्रस्तावित मॉनसून सत्र से पहले कैबिनेट में बड़ा बदलाव संभव है। वर्तमान में मोहन कैबिनेट में चार पद खाली हैं। ऐसे में सिर्फ विस्तार ही नहीं, बल्कि कई मंत्रियों की छुट्टी और नए चेहरों की एंट्री का रास्ता भी साफ हो सकता है। बताया जा रहा है कि पार्टी 2028 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर अभी से नई रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे नेताओं को मौका देने की तैयारी है, जिन्हें संगठन और सरकार दोनों में संतुलन बनाने वाला माना जाता है।

पुराने दिग्गजों की वापसी के संकेत
कैबिनेट विस्तार को लेकर जिन नामों की चर्चा है, उनमें कुछ पूर्व मंत्री और लंबे समय से संगठन में सक्रिय चेहरे भी शामिल बताए जा रहे हैं। पिछले ढाई साल से कई नेता सत्ता और संगठन में बड़ी जिम्मेदारी की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अब उन्हें मौका देकर पार्टी क्षेत्रीय और जातीय समीकरण साधने की कोशिश कर सकती है।

बीजेपी के भीतर यह भी माना जा रहा है कि अगर अभी बदलाव होता है, तो नए मंत्रियों को 2028 चुनाव से पहले करीब दो साल का पर्याप्त समय मिलेगा, जिससे वे अपने क्षेत्रों में सरकार की पकड़ मजबूत कर सकें।

सत्ता और संगठन दोनों की अग्निपरीक्षा
मध्य प्रदेश बीजेपी के लिए आने वाले महीने बेहद अहम माने जा रहे हैं। एक तरफ संगठन सरकार के प्रदर्शन को कसौटी पर कस रहा है, तो दूसरी तरफ विपक्ष भी सरकार को घेरने की तैयारी में है। ऐसे में मोहन कैबिनेट का संभावित फेरबदल सिर्फ मंत्रियों की अदला-बदली नहीं, बल्कि 2028 के चुनावी रण की शुरुआती बिसात माना जा रहा है।

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