देश

चीन के ‘मनगढ़ंत नाम’ पर भारत का सख्त रुख, भारतीय विदेश मंत्रालय का करारा जवाब

नई दिल्ली.
चीन द्वारा स्थानों को मनगढ़ंत नाम दिए जाने के संबंध में मीडिया के प्रश्नों के उत्तर में विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने जवाब देते हुए कहा कि भारत, चीन द्वारा भारत की भूमि का हिस्सा बनने वाले स्थानों को मनगढ़ंत नाम देने के किसी भी शरारती प्रयास को स्पष्ट रूप से खारिज करता है।

चीन द्वारा झूठे दावे करने और निराधार कथाएं गढ़ने के ऐसे प्रयास इस निर्विवाद वास्तविकता को नहीं बदल सकते कि अरुणाचल प्रदेश सहित ये स्थान और क्षेत्र भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा थे, हैं और हमेशा रहेंगे।
चीन की ये कार्रवाइयां भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर और सामान्य बनाने के चल रहे प्रयासों को बाधित करती हैं। चीन को ऐसे कार्यों से बचना चाहिए जो संबंधों में नकारात्मकता पैदा करते हैं और बेहतर समझ बनाने के प्रयासों को कमजोर करते हैं।

चीन ने 2021 में भी अरुणाचल के 21 स्थानों के नाम बदलने का प्रयास किया
चीन ने शातिराना चाल चलते हुए दिसंबर 2021 में भारत के 21 स्थानों के नाम बदलने का प्रयास किया। चीन इतना शातिर निकला कि अरुणाचल के 11 जिलों जिसमें तवांग से लेकर अंजॉ के स्टैंडर्ड नाम चीनी, तिब्बती और रोमन में जारी कर दिया था। भारत ने तब चीन के इस कदम को अस्वीकार्य बताया और कहा था कि नए नाम रख देने से जमीनी सच्चाई नहीं बदल जाती। भारत ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है और हमेशा रहेगा।

राज्यपाल ने किया था एलएसी का दौरा
इससे पहले 9 अप्रैल 2026 को अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल केटी परनाइक (सेवानिवृत्त) ने गुरुवार को तवांग जिले में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास 'खेन्जेमाने' का दौरा किया था। वहां उन्होंने सैनिकों का मनोबल ऊंचा बनाए रखने और हर समय मानसिक रूप से सतर्क रहने के लिए प्रोत्साहित किया।

लोक भवन के एक अधिकारी ने बताया कि दुर्गम इलाकों और कठोर मौसम के बीच स्थित यह सीमा चौकी भारत की सतर्कता और जुझारूपन का प्रतीक है। राज्यपाल की इस यात्रा को देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले बलों के प्रति एकजुटता के एक सशक्त संकेत के रूप में देखा गया।

 

Related Articles

Back to top button