मध्य प्रदेश

दृष्टिबाधिता को संकल्प से दी मात.

भोपाल 

परिस्थितियां चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, दृढ़ संकल्प, शिक्षा और निरंतर परिश्रम से सफलता की नई इबारत लिखी जा सकती है। इसे चरितार्थ किया है रायसेन जिले के पड़रिया कलां गांव निवासी योगेश धाकड़ ने  100 प्रतिशत दृष्टिबाधित योगेश धाकड़ ने बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल से राजनीति विज्ञान (Political Science) विषय के अंतर्गत दिव्यांगजनों के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषय पर पीएचडी शोध पूर्ण कर प्रेरणादायी उपलब्धि हासिल की है।
योगेश धाकड़ वर्तमान में मध्यप्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं और शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बरेली, जिला रायसेन में अध्यापन सेवाएं दे रहे हैं। स्वयं दृष्टिबाधित होते हुए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विद्यार्थियों को शिक्षित करने के साथ उन्होंने शोध के माध्यम से दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण और उनके विकास से जुड़े शासकीय प्रयासों का भी गंभीर अध्ययन किया है।

दिव्यांगजनों के विकास को बनाया शोध का विषय

योगेश धाकड़ ने राजनीति विज्ञान विषय के अंतर्गत “दिव्यांगजनों के विकास में शासन की योजनाओं का व्यावहारिक अध्ययन (मध्यप्रदेश के विशेष संदर्भ में)” विषय पर शोध किया है।
अपने शोध में उन्होंने मध्यप्रदेश के विशेष संदर्भ में दिव्यांगजनों के विकास एवं कल्याण के लिए शासन द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की व्यावहारिक उपयोगिता, जमीनी क्रियान्वयन, लाभार्थियों तक पहुंच और उनके जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन किया।
इस शोध का महत्व इसलिए भी विशेष है क्योंकि शोधार्थी स्वयं 100 प्रतिशत दृष्टिबाधित हैं। ऐसे में उनके अध्ययन में अकादमिक दृष्टिकोण के साथ दिव्यांगजनों की वास्तविक परिस्थितियों के प्रति व्यक्तिगत अनुभव, संवेदनशीलता और व्यावहारिक समझ का भी समावेश है।

डॉ. अनुपमा यादव के मार्गदर्शन में पूर्ण हुआ शोध

योगेश धाकड़ ने अपना शोध कार्य डॉ. अनुपमा यादव, विभागाध्यक्ष

(राजनीति विज्ञान), भेल शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भोपाल के मार्गदर्शन में पूर्ण किया।शोध में दिव्यांगजनों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास, शासकीय सहायता, योजनाओं की पहुंच, उनके व्यावहारिक क्रियान्वयन तथा दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में शासन की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को केंद्र में रखा गया।
यह अध्ययन दिव्यांगजनों के लिए संचालित शासकीय योजनाओं की जमीनी स्थिति को समझने के साथ-साथ भविष्य में उन्हें और अधिक सुलभ, प्रभावी एवं परिणामोन्मुखी बनाने की दिशा में भी उपयोगी संदर्भ प्रदान कर सकता है।

पड़रिया कलां से असिस्टेंट प्रोफेसर और अब पीएचडी तक प्रेरक सफर.

रायसेन जिले के पड़रिया कलां गांव से निकलकर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने और अब राजनीति विज्ञान में पीएचडी पूर्ण करने तक योगेश धाकड़ का सफर प्रेरणादायी है। दृष्टिबाधिता उनके शैक्षणिक और व्यावसायिक लक्ष्यों के मार्ग में बाधा नहीं बन सकी। उन्होंने शिक्षा को अपनी शक्ति बनाते हुए न केवल स्वयं उच्च शिक्षा में मुकाम हासिल किया, बल्कि आज विद्यार्थियों को शिक्षित कर नई पीढ़ी के निर्माण में भी योगदान दे रहे हैं।
उनकी उपलब्धि का महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि उन्होंने अपने शोध के लिए उसी समुदाय के विकास से जुड़ा विषय चुना, जिसकी चुनौतियों और आवश्यकताओं को वे स्वयं बेहद करीब से समझते हैं।

दिव्यांग युवाओं के लिए बने प्रेरणा.

योगेश धाकड़ की यह उपलब्धि केवल पीएचडी की उपाधि हासिल करने तक सीमित नहीं है। एक 100 प्रतिशत दृष्टिबाधित व्यक्ति का उच्च शिक्षा विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में सेवाएं देना और राजनीति विज्ञान में दिव्यांगजनों के विकास एवं शासकीय योजनाओं पर शोध करना, समावेशी शिक्षा और दिव्यांगजन सशक्तिकरण का प्रेरक उदाहरण है।

उनकी सफलता यह संदेश देती है कि उचित अवसर, शिक्षा, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के माध्यम से दिव्यांगजन न केवल आत्मनिर्भर बन सकते हैं, बल्कि शिक्षक, शोधकर्ता और सामाजिक परिवर्तन के वाहक के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
योगेश धाकड़ की इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर उनके परिवारजनों, गुरुजनों, सहकर्मियों, विद्यार्थियों और शुभचिंतकों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

“दृष्टि की सीमा सपनों की सीमा नहीं होती— योगेश ने शिक्षा, अध्यापन और शोध के माध्यम से इसे सिद्ध कर दिखाया।”

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